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Wednesday, February 13, 2019

सिटी बस पर ‘अटल’ के नाम पर कांग्रेस ने उठाया सवाल

इंदौर. नगर निगम अटल इन्दौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड के नाम से बसों का संचालन कर रही है, जिसको लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश प्रवक्ता का कहना है कि जब प्रायवेट लिमिटेड के नाम पर रजिस्ट्रेशन हुआ है तो उसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम कैसे रखा जा सकता है। कोई प्रायवेट व्यक्ति नाम का उपयोग नहीं कर सकता है।

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ये आरोप मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया पेनलिस्ट व प्रवक्ता एडव्होकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने लगाए। कहना है कि नगर निगम द्वारा इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड के नाम से कारोबार शुरू करने के लिए कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 149(3) के अनुसारण में ए 181591 दिनांक 2005-1-12-2005 से प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया एवं निगम का प्रमाण पत्र डॉ. राजसिंह कम्पनियों का रजिस्ट्रार द्वारा ए 60221 एमपी 2005 एसीसी 18159 के जरिये प्राप्त किया गया। सवाल खड़े हो रहे हैं कि कम्पनी कौन बनाता है... कम्पनी किस रूप में बनती है? क्या एक अद्र्धशासकीय विभाग जिस पर शासन का नियंत्रण होता है, कम्पनी के रूप में रजिस्टर्ड हो सकती है और इन सबसे ऊपर अहम बिन्दु यह है कि, अटल इन्दौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड नाम इसे दे दिया गया।

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कांग्रेस का कहना है कि अटल सम्मानित नेता हैं, थे और रहेगें? वे केवल पूर्व प्रधानमंत्री नहीं थे बल्कि जननेता थे, किसी सम्मानित व्यक्ति के नाम को सम्मान देने हेतु पुल, सडक़, बंदरगाह, एयरपोर्ट, स्कूल, महाविद्यालय आदि का, योजना का नाम रखा जा सकता है पर ये सब सरकार कर सकती है, प्रायवेट लिमिटेड कम्पनी अपने नाम के साथ ऐसे व्यक्ति का नाम नहीं जोड़ सकती। नगर निगम ने सिटी बसों के संचालन हेतु प्रा. लि. कम्पनी बनाकर जो व्यवस्था की है। इसलिए उसे अधिकार नहीं है। सम्पूर्ण योजना अटलश्री योजनान्तर्गत नाम दिया जा सकता है। नगर निगम तत्काल इसके लिए माफी मांगे और दोषियों के खिलाफ राज्य सरकार कार्यवाही करे तथा योजना का नामकरण अटल जी के नाम पर सम्मानजनक रूप से दिया जाये न कि कंपनी के रूप में।



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