बहुत लंबे अंतराल के बाद आज मेरे एक पुराने मित्र का फोन आया। बात-चीत के दौरान उसने बताया कि आजकल वह बहुत निराश है। मैं समझा कि शायद इस कोरोना-संकट में स्वास्थ्य संबंधित या फिर कुछ आर्थिक परेशानी होगी। लेकिन कारण कुछ और ही था। उसने कहा कि जीवन के इतने समय बीत जाने के बाद भी वह कुछ बहुत बड़ा नहीं कर सका। बचपन से ही मन ही मन ढेरों योजनाएं बनाता था। उसके लिए रुटीन और टाइम टेबल भी तैयार कर लेता था। लेकिन, उसे कभी अमल नहीं कर पाया। वह प्रण लेता था कि नए साल से कुछ अच्छा करूंगा। जरूर करूंगा। कभी दीपावली के बाद से कुछ अच्छा करने की सोचता था लेकिन, कुछ भी नहीं हो सका। इस बार तो कोरोना-संकट के चार महीने में भी वह सिर्फ सोचता ही रह गया, एक-एक दिन करके चार महीने बीत गए, लेकिन फिर से कुछ नहीं हुआ।
दरअसल मेरे दोस्त में सेल्फ-मोटिवेशन की कमी है। और जब तक आप सेल्फ- मोटिवेटेड नहीं होंगें, कुछ भी संभव नहीं है। हमारे जीवन के रास्ते कितने प्रशस्त हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितने सेल्फ- मोटिवेटेड हैं। सेल्फ-मोटिवेशन बना रहे, इसके लिए सबसे जरूरी है कि आप अपनी क्षमताओं को बहुत ही अच्छी तरह से समझें। ऐसे तो कुछ भी असंभव नहीं है लेकिन, कई बार हमलोग ऐसी उम्मीदें कर लेते हैं जो सिर्फ हम लोगों पर निर्भर नहीं होती हैं। आपको दूसरों के प्रयासों पर आधारित सफलता के सपने नहीं देखने चाहिए। वर्तमान परिस्तिथियों में उपलब्ध साधनों से क्या कुछ संभव है, इस बात को समझना बहुत जरूरी होता है। समय के साथ अपने-आप में बदलाव, यह सबसे महत्वपूर्ण है। सफलता के रास्ते में आने वाले जोखिम को जरूर उठाइये। बगैर जोखिम उठाए आप किसी काम को अंजाम तक नहीं पहुंचा सकते हैं। सबसे जरूरी है कि आप अपनी नजर में अपनी इमेज को बढ़िया करें। चुस्त-दुरुस्त रहें। थोड़ा ही सही, प्रतिदिन व्यायाम जरूर करें। ऐसा करके देखें। जब आप पूरी तरह से फिट रहेंगें तब आप धीरे-धीरे सेल्फ-मोटिवेटेड महसूस करने लगेंगे।
सबसे पहले आप यह निश्चित करें कि आपको करना क्या है। उदाहरण के तौर पर आप इस कोरोना-संकट के दौर में अगले तीन महीने में क्या करना चाहते हैं, यह निश्चित करें। आप हमेशा इस बात का खयाल रखें कि आपको सिर्फ ऐसे ही लोगों के संपर्क में रहना है, जो खुद सेल्फ-मोटिवेटेड हैं। वरना जीवन से निराश लोगों से बात-चीत के बाद आप भी निराशा के भंवर में डूब जाएंगे। आपको इस बात के लिए दृढ-संकल्पित होना ही पड़ेगा कि हर हाल में आपको सकारात्मक भाव से भरे रहना होगा। कभी निराश नहीं होना है। एक और बात मैं अपने अनुभव के आधार पर बताना चाहता हूं। अगर आप प्रत्येक दिन किसी को कुछ सकारात्मक बातों से मोटिवेटे करने का प्रयास करेंगे, तब आप दिन के आखिर में खुद को भी मोटिवेटेड महसूस करेंगें। मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कि मैं जब किसी स्कूल, कॉलेज या फिर कॉर्पोरेट दुनिया के लोगों के लिए कुछ मोटिवेशनल-टॉक देने जाता हूं, तब उसके बाद सुनने वालों की प्रतिक्रिया को देखकर, महसूस करके खुद को मोटिवटेड महसूस करता हूं। दृढ इच्छा शक्ति और कठोर परिश्रम के बावजूद भी आप हमेशा तरक्की के रास्ते पर ही आगे बढ़ते रहेंगे, कोई जरूरी नहीं है। सफलता के रास्ते में उतार-चढ़ाव का सामना करना ही पड़ेगा। सेल्फ-मोटिवेशन एक सतत प्रक्रिया है। बस चलते रहना है। बिना थके, बिना रुके। कई बार मैंने देखा है कि कुछ लोग सेल्फ-मोटिवेशन के लिए खूब किताबें पढ़ते हैं, सेमिनारों में जाते हैं, यूट्यूब पर समय बिताते हैं। लेकिन, अमल कुछ भी नहीं करते हैं। इस प्रवृति को बदलना होगा। एक छोटा सा मंत्र है। अगर बीते हुए कल पर आपको कोई पश्चाताप नहीं है, कोई अफसोस नहीं है और आने वाले कल से कोई डर नहीं है, उसका बेसब्री से इंतजार है, तब समझ लीजिए कि आप सेल्फ-मोटिवेटेड हैं।
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