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Sunday, July 19, 2020

कर्नाटक में मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े को देना पड़ा था इस्तीफा, नीरा राडिया टेप कांड में कई बड़े मंत्री और बिजनेसमैन थे सवालों के घेरे में

राजस्थान में सियासी घमासान जारी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के आमने-सामने की जंग में अब ऑडियो टेप के जरिए भाजपा की भी एंट्री हो गई है। हाल ही में एक ऑडियो सामने आया था, जिसमें सरकार गिराने को लेकर सौदे की बात सामने आई थी।

जिसमें कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और कांग्रेस के विधायक भंवरलाल शर्मा का नाम सामने आया था। कांग्रेस नेसरकार गिराने व विधायकों की खरीद फरोख्त की साजिश का आरोप भाजपा पर लगाया तो भाजपा ने भी पलटवार करते हुए फोन टैपिंग पर सवाल खड़े कर दिए और सीबीआई जांच की मांग कर दी।

राज्य सरकार की तरफ से जांच भी गठित कर दी गई है और इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी राजस्थान के मुख्य सचिव सेरिपोर्ट तलब कर ली है। फोन टैपिंग भारतीयराजनीति में कोई पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी कई फोन टैपिंग के मामले सामने आ चुके हैं।

फोन टैपिंग के बाद 10 अगस्त 1988 को रामकृष्ण हेगड़े को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

1. जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री को देना पड़ा था इस्तीफा

बात 1988 की है। जनता पार्टी के नेता रामकृष्ण हेगड़े कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे। वे लगातार दो बार 1983 और 1985 में चुनाव जीत चुके थे। उन्हें गैर कांग्रेसी खेमे से पीएम पदके संभावित उम्मीदवार के रूप में देख जा रहा था। तभी कर्नाटक की सियासत में फोन टैपिंग का मामला सामने आया। केंद्र में राजीव गांधी की सरकार थी जो पहले से ही बोफोर्स मामले को लेकर घिरी हुई थी। उसके लिए यह मामला एक मौके की तरह था।

केंद्र सरकार ने अपनी एजेंसियों को जांच के लिए आदेश दे दिया। सघन जांच हुई, जिसमें सामने आया कि कर्नाटक पुलिस के डीआईजी ने कम से कम 50 नेताओं और बिजनेस मैन के फोन टेप करने के ऑर्डर दिए थे। इनमें हेगड़े के प्रतिद्वंदी भी शामिल थे। ऐसे में कर्नाटक के सीएम सवालों के घेरे में आ गए। वे अपना बचाव करते उससे पहले ही सुब्रहमण्यम स्वामी ने एक लेटर प्रेस में जारी कर दिया।

जिसमें एक पूर्व इंटेलिजेंस अधिकारी ने टेलिकॉम विभाग से कर्नाटक के नेताओं, व्यापारियों और पत्रकारों के फोन टेप करने की बात कही थी। एक अखबार ने तो केंद्र में मंत्री रहे अजीत सिंह की कॉल ट्रांस्क्रिप्ट (पूरी बातचीत) छाप दी।

इस दौरान सीएम बार-बार दोहराते रहे कि मैं मूल्यों की राजनीति करता हूं, लेकिन तब तक मामला सदन तक पहुंच गया था। वे चौतरफा घिर गए थे। इस्तीफे का दबाव बढ़ने लगा और आखिरकार 10 अगस्त 1988 को हेगड़े को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

छत्तीसगढ़ में अंतागढ़ टेप कांड खासा चर्चा में रहा, 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी मंतूराम पवार ने नामांकन के अंतिम दिन अपना नाम वापस ले लिया था।

2. अंतागढ़ टेप कांड : जब नाम वापसी के आखिरी दिन कांग्रेस प्रत्याशी ने वापस ले ली थी उम्मीदवारी

छत्तीसगढ़ की राजनीति में अंतागढ़ टेपकांड खासाचर्चा में रहा। इसका खुलासा होने के बाद प्रदेश की राजनीति सियासी भूचाल आ गया था। बात शुरू होती है 2014 के लोकसभा चुनाव से। भाजपा ने अंतागढ़ के विक्रम उसंडी को कांकेर से लोकसभा चुनाव का टिकट दिया। वे चुनाव में जीत गए, इसके बाद अंतागढ़ की सीट खाली हो गई।

कांग्रेस ने उपचुनाव के लिए इस सीट से मंतूराम पवार को टिकट दिया और भाजपा से भोजराम नाग को टिकट मिला। इस चुनाव में नाटकीय मोड़ तब आया जब नाम वापसी के आखिरी दिन रणनीति के तहत कांग्रेस प्रत्याशी मंतूराम पवार ने नाम वापस ले लिया। इससे भाजपा के प्रत्याशी को एक तरह से वॉक ओवर मिल गया और यह सीट भाजपा के खाते में चली गई।

बाद में इस पूरे मामले को लेकर एक टेप वायरल हुआ। जिसमें मंतूराम पवार को नाम वापस लेने के लिए 7 करोड़ के लेनदेन की बात सामने आई। टेप में पूर्व सीएम अजीत जोगी, उनके बेटे अमित, तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के दामाद डॉ. पुनीत गुप्ता की आवाज होने का दावा किया गया था।

इसको लेकर कांग्रेस ने शिकायत दर्ज कराई। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इसके लिए एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने सभी आरोपियों से वॉइस सैंपल दर्ज कराने की बात कही, लेकिन इन लोगों ने सैंपल देने से इंकार कर दिया। फिलहाल मामला कोर्ट में है।

2009-10 में नीरा राडिया टेप कांड आया था।भारतीय मूल की नीरा शर्मा का जन्म केन्या में हुआ। बाद में उन्होंने गुजराती व्यवसायी जनक राडिया से शादी की।

3. नीरा राडिया टेप कांडः पॉलिटिकल लॉबिंग और कॉरपोरेट लॉबिंग का आरोप

2009-10 में नीरा राडिया टेप कांड खासे चर्चा में रहा था। आयकर विभाग ने 2008 से 2009 के बीच नीरा राडिया के साथ कुछ वरिष्ठ पत्रकारों, राजनेताओं व कॉरपोरेट घरानों के अधिकारियों की बातचीत को रिकॉर्ड किया था। इसमें बड़े लेवल पर भ्रष्टाचार और पैसों के लेन-देन की बात सामने आई थी।

साथ ही कंपनियों को ठेका दिलाने के नाम पर वसूली की भी बात कही गई थी। इसके साथ ही नीरा राडिया पर पॉलिटिकल लॉबिंग का भी आरोप लगा था कि वह किस नेता को कौन सा मंत्री पद मिले इसके लिए लॉबिंग करती थी।

तब राडिया के 300 से ज्यादा फोन टेप किए गए थे। इसमें देश के कई नेताओं व बड़े कारोबारियों का नाम सामने आया था। इसमें तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा का भी नाम सामने आया था। बाद में उन्हें टू जी स्पेक्ट्रम मामले में इस्तीफा देना पड़ा था।

4. कर्नाटक :कांग्रेस ने भाजपा पर विधायकों की खरीद फरोख्त और सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया था
साल 2019 में कर्नाटक में कांग्रेस ने एक ऑडियो जारी कर बीजेपी पर खरीद फरोख्त का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने कहा था कि भाजपाकर्नाटक में कालाधन का इस्तेमाल कर सरकार को गिराने की साजिश रच रही है। प्रेस को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि बीएस येदियुरप्पा ने कांग्रेस-जेडीएस के विधायकों को करोड़ों रुपये देने की लालच देकर सरकार गिराने की कोशिश की है।
कथित तौर पर कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि येदियुरप्पा कांग्रेस-जेडीएस के विधायकों से बात कर रहे हैं। उन्हें लालच देकर सरकार गिराना चाह रहे हैं। पुलिस ने तब येदुरप्पा सहित तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।इसके बाद कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था और प्रदेश में येदुरप्पा की सरकार बनी। सरकार बनने के बाद येदुरप्पा ने टेपकांड की जांच सीबीआई से कराने की अनुमति दे दी।
पूर्व राज्यसभा सांसद अमर सिंह का नाम भी फोन टैपिंग विवाद में आया था। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया था।
5. अमर सिंह ने कांग्रेस सरकार पर लगाए थे फोन टैपिंग के आरोप
साल 2005-06 में अमर सिंह फोन टैपिंग मामला भी खासे चर्चा में रहा। उन्होंने अपनी बातचीत की टैपिंग किए जाने की बात कही थी। अमर सिंह ने केंद्र और सोनिया गांधी पर फोन टैपिंग का आरोप लगाया था। मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। चार साल तक केस चला और आखिरकार अमर सिंह ने अपना आरोप वापस ले लिया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अमर सिंह को कोर्ट का वक्त जाया करने के लिए फटकार भी लगाई थी।


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राजस्थान में इन दिनों सीएम गहलोत और पायलट खेमे के बीच सियासी घमासान जारी है। इस बीच फोन टैपिंग को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई है।


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