विदिशा. एसएटीआई को संचालित करने वाली एमजेईएस के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का चुनाव आज पूर्व नियोजित तरीके से हो गया। बिना आए ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को अध्यक्ष और मोतीलाल वोरा को उपाध्यक्ष चुन लिया गया। नया सचिव बनते ही डॉ. लक्ष्मीकांत मरखेड़कर ने सभी सदस्यों के बीच ऐलान कर दिया कि अब एसएटीआई में अकर्मण्य कर्मचारियों को निकाला जाएगा।
20 में से 10 सदस्य आए
प्रशासक द्वारा तय कार्यक्रम अनुसार शनिवार की सुबह 11 बजे बीओजी के चुनाव के लिए 20 सदस्यों में से राघवजी, डॉ. लक्ष्मीकांत मरखेड़कर, रमेश अग्रवाल, भरत छप्परवाल, उज्जवला फाल्के, एनके मोदी, अभिलाष खांडेकर, प्रशांत मेहता, अनूप राज और केके अग्रवाल एसएटीआई पहुंचे। यहां प्रशासक एमजे कुरैशी ने साधारण सभा की बैठक बुलाकर चुनाव कराए।
ऐसा कैसा चुनाव...
साधारण सभा का बहिष्कार कर बाहर आए राघवजी ने कहा कि ये कैसा चुनाव है, जिसमें चार्ज लेने वाले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ही नहीं हैं। साधारण सभा में चुनाव के तत्काल बाद अध्यक्ष को कार्यभार सौंपा जाता है। अध्यक्ष न हो तो उपाध्यक्ष को चार्ज देते हैं, लेकिन यहां तो दोनों ही नहीं हैं। उधर बीओजी सदस्य एनके मोदी ने बताया कि सचिव को चार्ज दिलाया जा रहा है।
कलेक्टर भी पहुंचे एसएटीआई
चुनाव को ध्यान में रखते हुए एसएटीआई में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। एक-एक कर सदस्य आते जा रहे थे। इस बीच कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह भी कैंपस में पहुंचे और कानून व्यवस्था का जायजा लिया। यहां एसडीएम लोकेन्द्र सरल, तहसीलदार आशुतोष शर्मा, टीआई राजेश सिन्हा, कांग्रे्रस नेता संजय सिंह रघुवंशी आदि कई लोग मौजूद थे।
नहीं आए तीन स्थानीय सदस्य
चुनाव प्रक्रिया के समय उम्मीद थी कि सोसायटी के सदस्य डॉ. पद्म जैन, नपाध्यक्ष और जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष भी बैठक में शामिल होंंगे और अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे, लेकिन पूरी प्रक्रिया में ये लोग एसएटीआई में नजर नहीं आए।
प्रशासक को आपत्ति दर्ज करा राघवजी ने किया बहिष्कार
एमजेईएस के सदस्य राघवजी ने साधारण सभा के शुरुआत में ही प्रशासक को अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराकर सभा का बहिष्कार कर बाहर आ गए। उन्होंने अपनी आपत्ति में कहा कि सोसायटी के हित और न्याय की दृष्टि से यह साधारण सभा निरस्त की जाना चाहिए। अन्यथा उक्त पूरी कार्रवाई मुझे अमान्य होगी। उन्होंने लिखा है कि जारी अधिसूचना में सोसायटी के अवैध सदस्यों को मान्यता दिए जाने के विरुद्ध मैंने जो आपत्तियां दी थीं, जिसे आपने अन्यायपूर्ण और मनमाने तरीके से अस्वीकार किया है। आपने अवैध सदस्यों को वैध मानकर उनके नामांकन स्वीकार कर उन्हें सोसायटी के पदाधिकारी बनने का मार्ग प्रशस्त किया है। यह कदम मप्र शासन के निर्णयों के प्रति घोर विरोधाभासी होकर अवैध है। यह साधारण सभा और बीओजी का गठन सहित अन्य सभी कार्रवाई पूरी तरह अवैधानिक है।
डॉ. मरखेड़कर बोले- दस्तखत करके चले जाते हैं कर्मचारी
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के गठन के बाद नवनिर्वाचित सचिव डॉ. लक्ष्मीकांत मरखेड़कर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि एसएटीआई में कई अकर्मण्य कर्मचारी मुफ्त में वेतन ले रहे हैं। वे आते हैं और दस्तखत करके चले जाते हैं, ऐसे कर्मचारियों को निकाला जाएगा। काम करें और वेतन लें। मुख्य सचिव ने कहा है कि शासन अब पैसा नहीं दे सकता। एसएटीआई अपने पैरों पर खड़ी हो और अपने आय के साधन बढ़ाए। डॉ. मरखेड़कर ने कहा कि ढाई वर्ष से संस्थान में फर्जी-फर्जी चल रहा है। लोग भूल जाते हैं कि ये सिंधिया रियासत का जिला है। सिंधिया के प्रयास से ही मुख्यमंत्री ने अभी 2.62 करोड़ की अतिरिक्त ग्रांट कॉलेज को दी है। लोगों ने अभी तक इसे नेतागिरी का अड्डा बना रखा था, अब यह नहीं चलेगा। जबकि बीओजी के सदस्य एनके मोदी ने पत्रकारों के हर सवाल पर साक्ष्य मांगे। उन्होंने एसएटीआई से संबंधित मुद्दों पर कहा बोर्ड में जो तय होगा, वह होगा।
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