सवाईमाधोपुर. Ranthambore in sawai madhopur बाघों के घर में दिनभर दौड़ती जिप्सियों पर अंकुश लगने से बाघ-बाघिनों को शांत व स्वच्छंद वातावरण मिल सकेगा। हाल ही में जयपुर में पीसीसीएफ अरिंदम तोमर की अध्यक्षता में हुई बैठक में रणथम्भौर के 1 से 5 जोन में फुल व हाफ डे सफारी बंद की गई है। इससे बाघों को तो राहत मिलेगी ही साथ ही मानवीय दखल से वन्यजीवों में बढ़ रही बेचैनी भी काफी हद तक अंकुश में रहेगी। हालांकि अभी जोन 6 से 10 में यह सफारी शुरू रहेगी, लेकिन बाघों का अधिक दबाव 1 से 5 में होने व पर्यटकों का इसी जोन में अधिक भ्रमण करना नुकसानदेह हो रहा था। इस निर्णय को वन्यजीव प्रेमियों ने भी सराहा है।
बढ़ गया था मानवीय दखल
फुल व हाफ डे सफारी के बंद होने से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि जंगल में मानवीय दखल सीमित होगा। वन विभाग की ओर से 2016 में रणथम्भौर में फुल व हाफ डे सफारी शुरू करने के बाद से रणथम्भौर में बाघ पर्यावास क्षेत्र में दिन भर पर्यटन वाहनों की आवाजाही लगी रहती थी। इसके चलते बाघों के इलाके में मानवीय दखल बढ़ गया था। इससे बाघ डिस्टर्ब होकर जंगल से बाहर निकल कर आबादी क्षेत्र के नजदीक आ रहे थे।
तत्काल कोटे ने बिगाड़ी थी स्थिति
वन विभाग की ओर से आय बढ़ाने की मंशा से 2017 में फुल व हाफ डे सफारी में तत्काल कोटा भी शुरू कर दिया था। इसके तहत पर्यटक दस हजार रुपए अतिरिक्त शुल्क देकर कभी भी फुल व हाफ डे सफारी के लिए वाहन की बुकिंग कराकर भ्रमण पर जा सकता था, लेकिन 2018 में विभाग की ओर से यह कोटा बंद कर दिया था।
जोन फ्री रहते हंै वाहन
फुल व हाफ डे सफारी में जाने वाले वाहन पूरी तरह से जोन फ्री रहते हैं। जबकि नॉर्मल सफारी में पर्यटक का भ्रमण का जोन निश्चित कर दिया जाता है। वह केवल एक ही जोन पर भ्रमण पर जा सकता है।
फिल्म मेकर्स के लिए करनी थी शुरू, कर दी सबके लिए
वन विभाग की ओर से पूर्व में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर व फिल्म मेकर के लिए यह सफारी शुरू करने का था, लेकिन धीरे-धीरे सभी के लिए इसे शुरू कर दिया। विभाग की ओर से करोड़ों की आय के लिए बाघों की सुरक्षा व स्वास्थ्य को नजर अंदाज किया गया।
प्रतिदिन दस वाहन जाते हैं भ्रमण पर
विभाग की ओर से 2016 में फुल व हाफ डे सफारी के लिए पार्क भ्रमण पर प्रति पारी पांच वाहनों को पार्क भ्रमण पर फुल व हाफ डे सफारी के लिए भेजा जाता है। इसके अतिरिक्त तत्काल में पांच वाहनों का कोटा अलग से निर्धारित किया गया था। इसके बाद 2018 में पूरी बुकिंग के ऑनलाइन होने के बाद तत्काल कोटे को बंद कर किया दिया। वर्तमान में प्रतिदिन दोनों पारियों को मिलाकर 10 वाहन फुल व हाफ डे सफारी पर भेजे जा रहे थे।
अब बाघ बाघिन नहीं छोड़ेंगे इलाका
रणथम्भौर में दिन में भी बाघ पर्यावास क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही रहने के कारण विचलित होकर बाघ बाघिन अपना इलाका छोड़कर अन्य जगहों पर जा रहे थे। आमतौर में पर्यटक एक से पांच जोन में सफारी करने को तरजीह देते हैं। फुल व हाफ डे सफारी के चलते रणथम्भौर में करीब नौ बाघ-बाघिनों ने अपना इलाका छोड़ दिया था। इसमें टी-34 कुंभा, टी-8 लाडली व उसके शावक कालू-धोलू अन्य बाघ शामिल है।
ये बोले विशेषज्ञ....
वन्यजीवों के हित में है फैसला
दिन भर की सफारी से जंगल में वाहनों की आवाजाही रहती थी। इससे वन्यजीवों की प्राइवेसी भंग होती है और वन्यजीव डिस्टर्ब होते थे। सरकार की ओर से फुल व हाफ डे सफारी को बंद करने का फैसला वन्यजीवों के हित में है।
- दौलत सिंह शक्तावत, पूर्व एसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर
सरकार का निर्णय स्वागत योग्य
सरकार की ओर से किया गया फैसला स्वागत योग्य है। इससे मानव व वन्यजीवों के बीच का फांसला बना रहेगा। यह फैसला बाघों के संरक्षण की दिशा में काफी कारगर साबित होगा।
- तपेश्वर सिंह भाटी, अध्यक्ष, मुकुंदरा वन्यजीव व पर्यावरण समिति, कोटा।
बाघों को मिलेगा एकांत
फुल व हाफ डे सफारी से बाघों का एकांतवास भंग हो रहा है। इससे वन्यजीव परेशान थे। सरकार के इस निर्णय से बाघों को बेहतर पर्यावास व एकांत मिलेगा। जो बाघों के दूरगामी सकारात्मक परिणाम लाएगा।
- इकरामुद्दीन खान, उपाध्यक्ष, रणथम्भौर सफारी व्हीकल ऑनर्स यूनियन, सवाईमाधोपुर
वन्यजीवों को मिलेगा सुकून
सरकार की ओर से फुल व हाफ डे सफारी बंद करने के निर्णय से वन्यजीवों को राहत मिलेगी। पर्यटन सीमित होना चाहिए, लेकिन फुल व हाफ डे सफारी से प्रकृति के नियम टूट रहे थे। इसे बंद करने से रणथम्भौर में भविष्य में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। साथ ही बाघों को बेकहतर व सुरक्षित पर्यावास मिल सकेगा।
- आरएन महरोत्रा, पूर्व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक
ये रहा साल दर साल वाहनों का आंकड़ा ...
2016-17 2623
2017-18 4050
2018-19 2700
यह है फुल व हाफ डे सफारी से आय का गणित.....
2016-17 2.27 करोड़
2017-18 4.0 करोड़
2018-19 3.73 करोड़
यह है पर्यटकों के आंकड़े....
2016-17 13115
2017-18 16221
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